भैरव चालीसा

Posted at 2018-11-19 06:56:49
<b>भैरव चालीसा&nbsp;</b>

<span style="font-size: 16px;">॥ दोहा ॥&nbsp;</span>

<span style="font-size: 16px;">श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ ।</span>

<span style="font-size: 16px;">चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल ।</span>

<span style="font-size: 16px;">श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">॥ चौपाई ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी- कुतवाला ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जयति बटुक भैरव भय हारी । जयति काल- भैरव बलकारी ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जयति नाथ भैरव विख्याता । जयति सर्व भैरव सुखदाता ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">भैरव रूप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">भैरव रव सुनि हवै भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">शेष महेश आदि गुण गायो । काशी- कोतवाल कहलायो ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जटा जूट शिर चंद्र विराजत । बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">कटि करधनी घुंघरू बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जीवन दान दास को दीन्ह्यो । कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">वसि रसना बनि सारद काली । दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">धन्य धन्य भैरव भय भंजन । जय मनरंजन खल दल भंजन ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">रूप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">अगणित भूत प्रेत संग डोलत । बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">रुद्रकाय काली के लाला । महा कालहू के हो काला ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">बटुक नाथ हो काल गंभीरा । श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">करत नीनहूं रूप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">रत्नन जड़ित कंचन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय । वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">महा भीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय । स्वानारुढ़ जय चंद्र नाथ जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर । चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">करि मद पान शम्भु गुणगावत । चौंसठ योगिन संग नचावत ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।&nbsp; काशी कोतवाल अड़बंगा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">देयं काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा से मोटा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जनकर निर्मल होय शरीरा । मिटै सकल संकट भव पीरा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">श्री भैरव भूतों के राजा ।&nbsp; बाधा हरत करत शुभ काजा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">ऐलादी के दुख निवारयो ।&nbsp; सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">सुन्दर दास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">॥ दोहा ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार ।</span>

<span style="font-size: 16px;">कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार ॥</span>

<span style="font-size: 16px;">॥ इति श्री भैरव चालीसा ॥</span>

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