शिर्डी साईबाबा महिम्न स्तोत्र

Posted at 2018-11-25 11:40:41
शिर्डी साई बाबा स्तोत्र

<span lang="hi-IN">सदासत्स्वरूपं चिदानन्दकन्दं</span>
<span lang="hi-IN">जगत्सम्भवस्धान संहार हेतुं</span>
<span lang="hi-IN">स्वभक्तेच्छया मानुषं दर्शयन्तं</span>
<span lang="hi-IN">नमामीश्वरं सद्गुरुं सायिनाथं ...</span>

<span lang="hi-IN">भवाम्भोदि मग्नार्धितानां जनानां</span>
<span lang="hi-IN">स्वपादाश्रितानां स्वभक्ति प्रियाणां</span>
<span lang="hi-IN">समुद्दारणार्धं कलौ सम्भवन्तं</span>
<span lang="hi-IN">नमामीश्वरं सद्गुरुं सायिनाथं ...</span>

<span lang="hi-IN">सदानिम्ब वृक्षस्यमुलाधि वासात्</span>
<span lang="hi-IN">सुधास्राविणं तिक्त मप्य प्रियन्तं</span>
<span lang="hi-IN">तरुं कल्प वृक्षाधिकं साधयन्तं</span>
<span lang="hi-IN">नमामीश्वरं सद्गुरुं सायिनाथं ...</span>

<span lang="hi-IN">अनेका शृता तर्क्य लीला विलासै</span>:
<span lang="hi-IN">समा विष्कृतेशान भास्वत्र्पभावं</span>
<span lang="hi-IN">अहम्भावहीनं प्रसन्नात्मभावं</span>
<span lang="hi-IN">नमामीश्वरं सद्गुरुं सायिनाथं ...</span>

<span lang="hi-IN">सतां विश्रमाराम मेवाभिरामं</span>
<span lang="hi-IN">सदासज्जनै संस्तुतं सन्नमद्भि</span>:
<span lang="hi-IN">जनामोददं भक्त भद्र प्रदन्तं</span>
<span lang="hi-IN">नमामीश्वरं सद्गुरुं सायिनाथं ...</span>

<span lang="hi-IN">अजन्माद्यमेकं परम्ब्रह्म साक्षात्</span>
<span lang="hi-IN">स्वयं सम्भवं राममेवावतीर्णं</span>
<span lang="hi-IN">भवद्दर्शनात्सम्पुनीत</span>: <span lang="hi-IN">प्रभोहं</span>
<span lang="hi-IN">नमामीश्वरं सद्गुरुं सायिनाथं ...</span>

<span lang="hi-IN">श्रीसायिश कृपानिधे खिलनृणां सर्वार्धसिद्दिप्रद</span>
<span lang="hi-IN">युष्मत्पादरज</span>: <span lang="hi-IN">प्रभावमतुलं धातापिवक्ताक्षम</span>:
<span lang="hi-IN">सद्भक्त्याश्शरणं कृताञ्जलिपुट</span>: <span lang="hi-IN">सम्प्राप्तितोस्मिन् प्रभो</span>
<span lang="hi-IN">श्रीमत्सायिपरेश पाद कमलान् नान्यच्चरण्यंमम ....</span>

<span lang="hi-IN">सायिरूपधर राघवोत्तमं</span>
<span lang="hi-IN">भक्तकाम विबुध द्रुमं प्रभुं</span>
<span lang="hi-IN">माययोपहत चित्त शुद्धये</span>
<span lang="hi-IN">चिन्तयाम्यह महर्निशं मुदा ...</span>

<span lang="hi-IN">शरत्सुधांशं प्रतिमं प्रकाशं</span>
<span lang="hi-IN">कृपातपत्रं तवसायिनाथ</span>
<span lang="hi-IN">त्वदीयपादाब्ज समाश्रितानां</span>
<span lang="hi-IN">स्वच्छाययाताप मपाकरोतु ...</span>

<span lang="hi-IN">उपासनादैवत सायिनाथ</span>
<span lang="hi-IN">स्मवैर्म योपासनि नास्तुतस्त्वं</span>
<span lang="hi-IN">रमेन्मनोमे तवपादयुग्मे</span>
<span lang="hi-IN">भ्रुङ्गो यदाब्जे मकरन्दलुब्ध</span>: ...

<span lang="hi-IN">अनेकजन्मार्जित पापसङ्क्षयो</span>
<span lang="hi-IN">भवेद्भवत्पाद सरोज दर्शनात्</span>
<span lang="hi-IN">क्षमस्व सर्वानपराध पुञ्जकान्</span>
<span lang="hi-IN">प्रसीद सायिश सद्गुरो दयानिधे ...</span>

<span lang="hi-IN">श्रीसायिनाथ चरणामृत पूर्णचित्ता</span>
<span lang="hi-IN">तत्पाद सेवनरता स्सत तञ्च भक्त्या</span>
<span lang="hi-IN">संसारजन्य दुरितौघ विनिर्ग तास्ते</span>
<span lang="hi-IN">कैवल्य धाम परमं समवाप्नुवन्ति ...</span>

<span lang="hi-IN">स्तोत्रमे तत्पठेद्भक्त्या योन्नरस्तन्मनासदा</span>
<span lang="hi-IN">सद्गुरो</span>: <span lang="hi-IN">सायिनाथस्य कृपापात्रं भवेद्भवं ...</span>

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