नानापरिमळ दुर्वा

नानापरिमळ दुर्वा नानापरिमळ दुर्वा शेंदूर शमिपत्रें । लाडू मोद्क अन्ने परिपूरित पात्रें ।। ऎसे पूजन केल्या बीजाक्षरमंत्रे । अष्टहि सिद्धी

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आरती सप्रेम जयजय स्वामी गजवदना

आरती सप्रेम जयजय स्वामी गजवदना आरती सप्रेम जयजय स्वामी गजवदना । तुझिया स्मरणें जाति पातकें पार्वतीनंदना । मोरया पार्वतीनंदना ॥

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श्री कालिका ध्यानाष्टकम्

कालिका  अष्टकम् श्रीकालिकाध्यानाष्टकम् कंकंकं कालकाला कलकलवदना कालरूपा कराला खंखंखं ख्यातखेटा खटखटदशना खण्डशुभ्रांशुमुण्डा। गंगंगं गुप्तगोत्रा गरगरगदना गर्ज्जना गाढगात्रा घंघंघं घोरघोरा घनघननयना

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कामाक्षी स्तोत्र

कामाक्षी  स्तोत्रम् कल्पानोकह पुष्प जाल विलसन्नीलालकां मातृकां कान्तां कञ्ज दलेक्षणां कलि मल प्रध्वंसिनीं कालिकाम् । काञ्ची नूपुर हार दाम सुभगां

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श्रीलक्ष्मी पल्लीनाथ

— श्रीलक्ष्मी पल्लीनाथ — श्रावणमासी रविदिनी जे दर्शन घेती  | त्यांची सर्वही पापे नाशाप्रती जाती  | प्रेमानंदे त्याची करिता ही स्तुती 

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महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्

महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्  अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि

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