सर्व कामना सिद्धी स्तोत्र

सर्व-कामना-सिद्धि स्तोत्रश्री हिरण्य-मयी हस्ति-वाहिनी, सम्पत्ति-शक्ति-दायिनी।मोक्ष-मुक्ति-प्रदायिनी, सद्-बुद्धि-शक्ति-दात्रिणी।।१सन्तति-सम्वृद्धि-दायिनी, शुभ-शिष्य-वृन्द-प्रदायिनी।नव-रत्ना नारायणी, भगवती भद्र-कारिणी।।२धर्म-न्याय-नीतिदा, विद्या-कला-कौशल्यदा।प्रेम-भक्ति-वर-सेवा-प्रदा, राज-द्वार-यश-विजयदा।।३धन-द्रव्य-अन्न-वस्त्रदा, प्रकृति पद्मा कीर्तिदा।सुख-भोग-वैभव-शान्तिदा, साहित्य-सौरभ-दायिका।।४वंश-वेलि-वृद्धिका, कुल-कुटुम्ब-पौरुष-प्रचारिका।स्व-ज्ञाति-प्रतिष्ठा-प्रसारिका, स्व-जाति-प्रसिद्धि-प्राप्तिका।।५भव्य-भाग्योदय-कारिका, रम्य-देशोदय-उद्भाषिका।सर्व-कार्य-सिद्धि-कारिका, भूत-प्रेत-बाधा-नाशिका।अनाथ-अधमोद्धारिका,

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स्वधा स्तोत्र

स्वधा स्तोत्र पितृ आशिर्वाद साठी, पितरांना मोक्ष सद्गती मिळण्यासाठी या स्तोत्राचा लाभ होतो. पितरांच्या तिथीला तसेच पितृपक्षाध्ये रोज हे स्तोत्र

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अमोघ शिव कवच स्तोत्र

अमोघ शिव कवचम् विनियोगः | अस्य श्री-शिव-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीसदाशिव-रुद्रो देवता, ह्रीं शक्तिः, वं कीलकम्, श्रीं ह्रीं क्लीं

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श्री अपराजिता स्तोत्र कवच मालामंत्र

।।अथ श्री अपराजिता स्तोत्र।। इस स्तोत्र के नित्य पठण से सर्व बाधा पिडा शत्रुओका नाश होकर सर्व समृद्धी संततीसौख्य आदी

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श्री काळभैरव अष्टक स्तोत्र

|| श्री काळभैरव अष्टक स्तोत्र || ॐ नमः शिवाय .. श्री गणेशाय नमः .. अङ्गसुन्दरत्व निन्दिताङ्ग जातवैभवम् भृङ्गसर्व गर्वहारि देहकान्ति

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श्रीकृष्ण कृत दुर्गम संकटनाशन स्तोत्र

श्रीकृष्ण कृत दुर्गा स्तुती स्तोत्र दुर्गम संकटनाशन स्तोत्र ॥ श्रीकृष्ण उवाच ॥ त्वमेव सर्वजननी मूलप्रकृतिरीश्वरी । त्वमेवाद्या सृष्टिविधौ स्वेच्छया त्रिगुणात्मिका

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दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रम्

दारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रम् विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय । कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ १॥ गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय । गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय

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श्रीकाशी विश्वनाथाष्टकम्

|| श्रीकाशी विश्वनाथाष्टकम् || गङ्गा तरङ्ग रमणीय जटा कलापंगौरी निरन्तर विभूषित वाम भागंनारायण प्रियमनङ्ग मदापहारंवाराणसी पुरपतिं भज विश्वनाधम् ॥ १

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दत्तबावनी मूळ गुजराती

दत्तबावनी जय योगिश्वर दत्त दयाळ तुज एक जगमा प्रतिपाळ ||1|| अत्र्यनसुया करी निमित्त प्रगट्यो जगकारण निश्चित् ||2|| ब्रम्हा हरिहरनो अवतार

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