नारायण सुक्त पुराणोक्त
नारायण सुक्त पुराणोक्त( देवतांच्या अभिषेक पूजन साठी ) ॐ सहस्र शीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशंभुवम् ।विश्वै नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम्
Read moreस्तोत्र – मंत्र
नारायण सुक्त पुराणोक्त( देवतांच्या अभिषेक पूजन साठी ) ॐ सहस्र शीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशंभुवम् ।विश्वै नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम्
Read more|| श्री दत्त अष्टकम् || गुरुमूर्तिं चिदाकाशं सच्चिदानन्दविग्रहं ।निर्विकल्पं निराबाधं दत्तमानन्दमाश्रये ॥ १ ॥ योगातीतं गुणातीतं सर्वरक्षाकरं विभुं ।सर्वदुःखहरं देवं
Read moreसर्व-कामना-सिद्धि स्तोत्रश्री हिरण्य-मयी हस्ति-वाहिनी, सम्पत्ति-शक्ति-दायिनी।मोक्ष-मुक्ति-प्रदायिनी, सद्-बुद्धि-शक्ति-दात्रिणी।।१सन्तति-सम्वृद्धि-दायिनी, शुभ-शिष्य-वृन्द-प्रदायिनी।नव-रत्ना नारायणी, भगवती भद्र-कारिणी।।२धर्म-न्याय-नीतिदा, विद्या-कला-कौशल्यदा।प्रेम-भक्ति-वर-सेवा-प्रदा, राज-द्वार-यश-विजयदा।।३धन-द्रव्य-अन्न-वस्त्रदा, प्रकृति पद्मा कीर्तिदा।सुख-भोग-वैभव-शान्तिदा, साहित्य-सौरभ-दायिका।।४वंश-वेलि-वृद्धिका, कुल-कुटुम्ब-पौरुष-प्रचारिका।स्व-ज्ञाति-प्रतिष्ठा-प्रसारिका, स्व-जाति-प्रसिद्धि-प्राप्तिका।।५भव्य-भाग्योदय-कारिका, रम्य-देशोदय-उद्भाषिका।सर्व-कार्य-सिद्धि-कारिका, भूत-प्रेत-बाधा-नाशिका।अनाथ-अधमोद्धारिका,
Read moreस्वधा स्तोत्र पितृ आशिर्वाद साठी, पितरांना मोक्ष सद्गती मिळण्यासाठी या स्तोत्राचा लाभ होतो. पितरांच्या तिथीला तसेच पितृपक्षाध्ये रोज हे स्तोत्र
Read moreअमोघ शिव कवचम् विनियोगः | अस्य श्री-शिव-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीसदाशिव-रुद्रो देवता, ह्रीं शक्तिः, वं कीलकम्, श्रीं ह्रीं क्लीं
Read more।।अथ श्री अपराजिता स्तोत्र।। इस स्तोत्र के नित्य पठण से सर्व बाधा पिडा शत्रुओका नाश होकर सर्व समृद्धी संततीसौख्य आदी
Read more|| श्री काळभैरव अष्टक स्तोत्र || ॐ नमः शिवाय .. श्री गणेशाय नमः .. अङ्गसुन्दरत्व निन्दिताङ्ग जातवैभवम् भृङ्गसर्व गर्वहारि देहकान्ति
Read moreश्रीकृष्ण कृत दुर्गा स्तुती स्तोत्र दुर्गम संकटनाशन स्तोत्र ॥ श्रीकृष्ण उवाच ॥ त्वमेव सर्वजननी मूलप्रकृतिरीश्वरी । त्वमेवाद्या सृष्टिविधौ स्वेच्छया त्रिगुणात्मिका
Read moreदारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रम् विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय । कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥ १॥ गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय । गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय
Read more|| श्रीकाशी विश्वनाथाष्टकम् || गङ्गा तरङ्ग रमणीय जटा कलापंगौरी निरन्तर विभूषित वाम भागंनारायण प्रियमनङ्ग मदापहारंवाराणसी पुरपतिं भज विश्वनाधम् ॥ १
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