ज्ञानेश्वरी अध्याय १२
||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १२ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय बारावा | भक्तियोगः | जय जय वो शुद्धे| उदारे
Read moreग्रंथ – पोथी
||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १२ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय बारावा | भक्तियोगः | जय जय वो शुद्धे| उदारे
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १३ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय तेरावा | क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगः | आत्मरूप गणेशु केलिया स्मरण| सकळ
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १४ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय चौदावा | गुणत्रयविभागयोगः | जय जय आचार्या| समस्तसुरवर्या| प्रज्ञाप्रभातसूर्या|
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १५ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय पंधरावा | पुरुषोत्तमयोगः | आतां हृदय हें आपुलें| चौफाळुनियां
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १६ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय सोळावा | दैवासुरसम्पद्विभागयोगः | मावळवीत विश्वाभासु| नवल उदयला चंडांशु|
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १७ || ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय सतरावा | श्रद्धात्रयविभागयोगः | विश्वविकासित मुद्रा| जया सोडी तुझी
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १८ || part 3 भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः | ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् ||५५||
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १८ || part 2 यत्तु कामेप्सुना कर्म साहंकारेण वा पुनः | क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ||२४|| तरी घरीं
Read more||ज्ञानेश्वरी भावार्थदीपिका अध्याय १८ || part 1 ||ॐ श्री परमात्मने नमः || अध्याय अठरावा || मोक्षसंन्यासयोगः | जयजय देव निर्मळ|
Read moreश्री शंकर महाराज स्तवन संतवर्य श्री योगिराज प्रभु शंकरमहाराज वंदन करूनी चरणि अर्पिता भक्तीचा साज ।।१।। अतर्क्यलीला, अगाध महिमा, अमर्याद
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