श्री गजानन महाराज अष्टक

श्री गजानन महाराज अष्टक (दासगणूकृत) गजानना गुणागरा परम मंगला पावना । अशींच अवघे हरी, दुरीत तेवि दुर्वासना ।। नसें त्रिभुवनामधे

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